वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध में मुस्लिम समुदाय का काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन

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केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ देशभर में मुस्लिम समुदाय ने विरोध दर्ज कराया। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के आह्वान पर मुस्लिम समाज ने रमजान के आखिरी शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की। AIMPLB ने इस विधेयक को मुसलमानों के धार्मिक और सामाजिक अधिकारों पर हमला बताते हुए शांतिपूर्ण और मौन विरोध का आग्रह किया था।

झारखंड और बिहार में विरोध प्रदर्शन

झारखंड की राजधानी रांची के कांके प्रखंड स्थित हुसीर गांव में मुस्लिम समुदाय ने काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की। स्थानीय लोगों ने सरकार से इस विधेयक को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह विधेयक धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों का हनन होगा।

वहीं, बिहार के कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड में हजारों मुसलमानों ने काली पट्टी बांधकर अलविदा की नमाज पढ़ी और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय खानकाह के नेताओं ने इस विधेयक को मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। उन्होंने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यह कानून धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता को खत्म करने का प्रयास है।

सरकार 2 अप्रैल को पेश करेगी विधेयक

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार 2 अप्रैल को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इस विधेयक का मकसद वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। हालांकि, मुस्लिम संगठनों का मानना है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को कमजोर करेगा और सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाएगा।

विपक्ष और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया

विधेयक के विरोध में विपक्षी दल भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने इसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन बताया है। AIMPLB सहित कई मुस्लिम संगठनों ने सरकार से इस विधेयक को वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर, अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने इस विधेयक का समर्थन किया है। उनका कहना है कि वक्फ संपत्तियों का सही प्रबंधन जरूरी है और विधेयक में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।

देशभर में मौन विरोध प्रदर्शन

यह विरोध प्रदर्शन देश के विभिन्न हिस्सों में देखने को मिला। मस्जिदों में नमाज के दौरान लोगों ने काली पट्टी बांधकर अपनी असहमति जताई। प्रदर्शनकारियों ने इसे मुसलमानों के धार्मिक मामलों में दखल बताते हुए कहा कि सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए। विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

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