वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 आज संसद में पेश किया जाएगा, जिसे लेकर भोपाल की मुस्लिम महिलाओं ने अपना समर्थन व्यक्त किया है। यह विधेयक 1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है, जिससे वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन को बेहतर बनाया जा सके।
संसद के फिर से सत्र में आने के साथ ही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू इसे पास कराने के लिए पेश करेंगे। इस विधेयक को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि इससे गरीब और पासमांदा (पिछड़े) मुस्लिमों को लाभ मिलेगा। उन्होंने इसे एक ‘ऐतिहासिक दिन’ करार देते हुए कहा कि जेपीसी ने विभिन्न राज्यों में हितधारकों से बात की और व्यापक चर्चा के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया।
विधेयक को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने
जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा, “हमारी मेहनत रंग लाई है…सरकार आज संशोधित रूप में इस बिल को पेश कर रही है। यह वास्तव में एक ऐतिहासिक दिन है। इस विधेयक के पारित होने के साथ ही गरीब और पासमांदा मुसलमानों को लाभ मिलने वाला है। हमने बीते छह महीनों में जेपीसी की बैठकें आयोजित कीं और प्रतिदिन आठ घंटे तक विपक्ष की बात सुनी।”
हालांकि, इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद किरण कुमार चमाला ने कहा कि वे इस बिल का विरोध करेंगे यदि इसमें किसी विशेष समुदाय के खिलाफ कोई प्रावधान पाया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने आज लोकसभा में इस पर आठ घंटे की चर्चा के लिए सहमति दी है, लेकिन चर्चा में उठाए गए मुद्दों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। “हम निश्चित रूप से इस विधेयक का विरोध करेंगे, यदि यह किसी समुदाय को कमजोर करने का प्रयास करता है। लोकतंत्र में सभी की आवाज सुनी जानी चाहिए और सरकार को जेपीसी की तरह विपक्ष की बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए,” चमाला ने कहा।
मुस्लिमों के लिए ‘सबसे बड़ी ईदी’
भाजपा नेता मोहसिन रजा ने इस विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और इसे ‘गरीब मुस्लिमों के लिए सबसे बड़ी ईदी’ बताया। उन्होंने कहा, “देश के सभी वंचित और पिछड़े मुस्लिम भाइयों और बहनों की ओर से, मैं प्रधानमंत्री मोदी को इस वक्फ संशोधन विधेयक के लिए धन्यवाद देता हूं। यह पिछड़े मुसलमानों के लिए पीएम मोदी की ओर से सबसे बड़ी ईदी होगी।”
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, इसमें वक्फ अधिनियम 1995 की खामियों को दूर करने और वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, प्रबंधन और निगरानी को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए संशोधन किए गए हैं। यह विधेयक तकनीक के उपयोग को बढ़ाने, वक्फ की परिभाषा को अद्यतन करने और अधिनियम का नाम बदलने जैसे कई सुधार लाने का प्रस्ताव करता है।
लोकसभा में आज प्रश्नकाल के बाद इस विधेयक पर चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा, जिसके लिए आठ घंटे का समय निर्धारित किया गया है। इस चर्चा के बाद विधेयक को पारित करने का प्रयास किया जाएगा।
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