आयुष्मान घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, झारखंड सहित चार राज्यों में 21 ठिकानों पर छापेमारी

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आयुष्मान भारत योजना से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को झारखंड में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। रांची के बरियातू इलाके में तीन से अधिक ठिकानों पर तलाशी ली गई, जबकि लालपुर और पीपी कंपाउंड जैसे व्यस्त इलाकों में भी ईडी की टीमें पहुंचीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की जा रही है जो मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े हुए हैं और जिन पर आयुष्मान योजना के तहत फर्जीवाड़ा करने का आरोप है।


सिर्फ झारखंड ही नहीं, ईडी ने अपनी कार्रवाई को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैलाया है। कुल मिलाकर 21 ठिकानों पर एक साथ रेड डाली गई है। इन छापों का सीधा संबंध आयुष्मान भारत योजना में हुए कथित फर्जी बिलों और अस्पतालों के पंजीकरण से जोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ निजी अस्पतालों ने लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के निजी सचिव के आवास पर छापा

जमशेदपुर में झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के निजी सचिव ओमप्रकाश सिंह उर्फ गुड्डू के आवास पर भी ईडी की रेड हुई। उनका घर मानगो डिमना रोड, एनएच-33 के पास है, जिसे सुरक्षा कारणों से छावनी में बदल दिया गया। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कार्रवाई में क्या-क्या बरामद हुआ है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ईडी के पास घोटाले से जुड़े मजबूत दस्तावेजी सबूत हैं।

विधायक सरयू राय ने किया बड़ा खुलासा

पश्चिमी जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने इस पूरे मामले पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस घोटाले को विधानसभा में कई बार उठाया था और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्रालय की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना है कि कोरोना काल में आयुष्मान योजना के तहत सबसे ज्यादा घोटाले हुए। “कई ऐसे फर्जी अस्पताल रजिस्टर्ड हो गए जिनका अस्तित्व ही नहीं था, वहीं कई अस्पतालों ने इलाज के नाम पर फर्जी बिल बनवाकर करोड़ों रुपये का भुगतान ले लिया,” सरयू राय ने कहा।

आयुष्मान घोटाले में ईडी की देशव्यापी छापेमारी जारी।

सरयू राय का यह भी कहना है कि आयुष्मान योजना में घोटाले के तार सरकार के मंत्रालय और सचिवालय तक जुड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में अब भी योजना के तहत 40 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया है, जो इस घोटाले की गंभीरता को उजागर करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईडी की कार्रवाई इसी वजह से हो रही है क्योंकि एजेंसी के पास पहले से ही ठोस सबूत मौजूद हैं।

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