पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, जो इन दिनों जेल में हैं, को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। जी हाँ, राजनीति की पिच पर चौके-छक्के जड़ने वाले खान साहब अब ‘शांति’ के लिए भी मैदान में हैं। पाकिस्तान वर्ल्ड एलायंस (PWA) और नॉर्वे के राजनीतिक दल पार्टिएट सेंट्रम ने रविवार को इस बात की घोषणा की कि वे इमरान खान को 2024 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित कर रहे हैं।
पार्टिएट सेंट्रम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “हम यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हैं कि हमने एक योग्य व्यक्ति के सहयोग से पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया है। उन्होंने पाकिस्तान में मानवाधिकारों और लोकतंत्र के लिए सराहनीय कार्य किया है।”
कैद में भी मचा रहे क्रांति
इमरान खान का राजनीतिक सफर किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं रहा है। कभी क्रिकेट के मैदान पर विपक्षी गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले खान, अब अपनी राजनीतिक पारी में विरोधियों से भिड़ रहे हैं। 2018 में प्रधानमंत्री बनने के बाद, इमरान ने खुद को पाकिस्तान के ‘सबसे ईमानदार’ नेता के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन राजनीति का खेल क्रिकेट से कहीं अधिक मुश्किल निकला।
2022 में सत्ता से हटाए जाने के बाद इमरान खान पर एक के बाद एक कानूनी मामलों की बौछार होने लगी। उनके समर्थकों का कहना है कि खान को जेल में डालकर उन्हें राजनीति से दूर रखने की साजिश की जा रही है, जबकि विरोधी इसे ‘कानूनी न्याय’ बता रहे हैं। इस बीच, जेल की चार दीवारी के अंदर बैठे-बैठे ही खान को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन मिल जाना, राजनीति के रंगमंच पर एक नया ट्विस्ट ले आया है।
2019 में भी हुए थे नामांकित
यह पहली बार नहीं है जब इमरान खान का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सामने आया है। 2019 में भी उन्हें दक्षिण एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए नामांकित किया गया था, जब उन्होंने भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को पाकिस्तान से रिहा करने का फैसला किया था। तब उनके इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना हुई थी। हालांकि, उस साल पुरस्कार किसी और को मिल गया, लेकिन इमरान खान का नाम इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चर्चा में आ गया था।
नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में नामांकित होना कोई छोटी बात नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि नामांकन के बाद पुरस्कार पक्का हो जाता है। अब सवाल यह है कि क्या नोबेल कमेटी इमरान खान को वास्तव में यह पुरस्कार देगी? अगर ऐसा होता है, तो यह इतिहास में एक अनोखी मिसाल होगी – जहाँ एक व्यक्ति जेल में बैठकर ‘शांति दूत’ का ताज पहन सकता है।
पाकिस्तान की राजनीति में हर दिन कुछ नया देखने को मिलता है। इमरान खान की यह नोबेल नामांकन गाथा एक नया मोड़ लाने वाली है। अब देखना यह होगा कि खान साहब सच में ‘नोबेलवाले खान’ बनते हैं या यह खबर भी पाकिस्तान की राजनीति के कई अन्य वादों की तरह सिर्फ चर्चा तक ही सीमित रह जाती है।
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