मंगलवार को संसद में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Mahakumbh 2025 की भव्यता पर अपने विचार रखे और इसे ‘सबका प्रयास’ का जीवंत उदाहरण बताया। वहीं, विपक्ष ने भी अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए इस ऐतिहासिक आयोजन की खामियों को उजागर किया। कुल मिलाकर, संसद में महाकुंभ की चर्चा का रंग कुछ ऐसा चढ़ा कि धर्म, संस्कृति, राजनीति और विवाद सबका संगम हो गया!
प्रयागराज में आयोजित इस 45-दिनों के मेगा इवेंट में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद 5 फरवरी को त्रिवेणी संगम में स्नान किया और मां गंगा की आराधना की। उन्होंने कहा, “महाकुंभ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति का भव्य प्रदर्शन है। इस आयोजन ने पूरी दुनिया को भारत की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।”
प्रधानमंत्री ने दुनिया में जारी युद्धों और अशांति का जिक्र करते हुए कहा, “जब पूरा विश्व संघर्षों में उलझा हुआ है, तब भारत महाकुंभ जैसे आयोजन के जरिए एकता और सौहार्द का संदेश दे रहा है। हमारी विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और यह महाकुंभ उसका जीता-जागता उदाहरण है।”
भव्यता में विवाद का तड़का!
जहां एक ओर महाकुंभ ने दुनिया को भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई, वहीं दूसरी ओर आयोजन के दौरान कुछ विवाद भी उठ खड़े हुए। 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर भगदड़ मच गई, जिसमें सरकार के अनुसार 30 लोगों की मौत हुई। विपक्ष ने इस संख्या पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि असल संख्या कहीं अधिक है।
इसके अलावा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट में गंगा के जल में ‘फीकल कोलीफॉर्म’ बैक्टीरिया की मात्रा अधिक पाई गई, जिसे लेकर विपक्ष ने योगी सरकार की साफ-सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
महाकुंभ पर लोकसभा में हंगामा
महाकुंभ पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान के बाद लोकसभा में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्षी दलों ने भगदड़ और गंगा जल की गुणवत्ता पर सरकार से जवाब मांगा। स्पीकर ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने विपक्ष को नसीहत दी कि सदन नियमों से चलता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाकुंभ ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति को विश्व मंच पर स्थापित किया है। इस आयोजन में न केवल देशभर से श्रद्धालु शामिल हुए, बल्कि विदेशी राजनेताओं, फिल्मी सितारों और गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कह सकते हैं कि महाकुंभ सिर्फ पवित्र डुबकी का आयोजन नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, राजनीति और सामाजिक मुद्दों के एक अनोखे संगम का केंद्र बन गया!
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