हाल ही में संसद से पारित वक्फ अधिनियम (संशोधन) 2025 को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने गहरी चिंता जताई है। बोर्ड ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से तत्काल मिलने का समय मांगा है ताकि इस विवादास्पद अधिनियम पर अपनी आपत्तियां सामने रखी जा सकें।
बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. एस.क्यू.आर. इलियास ने मीडिया को बताया कि महासचिव मौलाना फज़लुर रहीम मुझद्ददी द्वारा राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा गया है जिसमें संशोधन अधिनियम की गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया है। उन्होंने कहा, “यह अधिनियम वक्फ संस्थाओं के प्रशासन और उनकी ऐतिहासिक स्वायत्तता को प्रभावित करता है, जो मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।”
संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ बताया अधिनियम
बोर्ड के पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि यह संशोधन भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, विशेष रूप से धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और धार्मिक संस्थाओं की रक्षा से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करता है। महासचिव ने लिखा, “हम मानते हैं कि इस अधिनियम के कई प्रावधान संविधान से मेल नहीं खाते और इन पर गंभीर पुनर्विचार की आवश्यकता है।”
पत्र में संशोधन को न केवल अलोकतांत्रिक बल्कि मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर सीधा हमला बताया गया है। AIMPLB का मानना है कि यह कानून मुस्लिमों की धार्मिक संपत्तियों और उनके प्रबंधन में अनुचित हस्तक्षेप करता है।
राष्ट्रपति से जल्द से जल्द समय देने का आग्रह
बोर्ड ने राष्ट्रपति से निवेदन किया है कि वे इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए उन्हें शीघ्र मिलने का समय दें। पत्र में लिखा गया है, “हम महामहिम से हाथ जोड़कर अनुरोध करते हैं कि हमें जल्द से जल्द मिलने का अवसर दें ताकि हम अपनी चिंता आपके समक्ष रख सकें और संविधानिक ढांचे के भीतर इसका समाधान तलाश सकें।”
AIMPLB ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति इस मामले को गंभीरता से लेंगी और मुस्लिम समुदाय की भावनाओं व अधिकारों का सम्मान करते हुए उचित निर्णय लेंगी।
डॉ. वकार उद्दीन लतीफी ने जारी किया पत्र
बोर्ड द्वारा जारी यह पत्र डॉ. वकार उद्दीन लतीफी, कार्यालय सचिव, के माध्यम से सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आज़ादी और संस्थागत संरचनाओं की रक्षा के लिए उठाया गया है।
अब सभी की निगाहें राष्ट्रपति भवन पर टिकी हैं कि क्या राष्ट्रपति इस मुलाकात का समय देती हैं और इस अधिनियम पर पुनर्विचार के संकेत मिलते हैं या नहीं।
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