प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद श्रीलंका के लिए रवाना हुए। इस सम्मेलन में उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग, संपर्क और आर्थिक विकास को लेकर भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। बिम्सटेक के जरिए भारत दक्षिण एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के पहले विदेशी अतिथि
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि वे श्रीलंका के नए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिसानायके द्वारा आमंत्रित किए गए पहले विदेशी नेता हैं। डिसानायके ने सितंबर 2024 में श्रीलंका के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। मोदी की यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर अहम बातचीत हो सकती है। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और सैन्य प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर साझेदारी को बढ़ाने के लिए समझौते संभव हैं। भारत, श्रीलंका के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए रणनीतिक भागीदारी को अहम मानता है।
ऊर्जा, व्यापार और संपर्क को मिलेगा बल
रक्षा के साथ-साथ ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद है। भारत पहले ही श्रीलंका में ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश कर रहा है और इस दौरे में नई संयुक्त परियोजनाओं की घोषणा हो सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन को बेहतर बनाने और बंदरगाहों व परिवहन संपर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-श्रीलंका संबंधों को नई गति देने वाली मानी जा रही है, जिससे न केवल द्विपक्षीय हितों को बल मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
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