सर्दियां आते ही इंसान की जिंदगी दो हिस्सों में बंट जाती है- रजाई (blanket) के अंदर और रजाई के बाहर। रजाई के अंदर की दुनिया किसी सपनों की नगरी से कम नहीं होती, जबकि रजाई के बाहर की दुनिया एक युद्धभूमि की तरह लगती है। ठंडी हवाएं, सुस्त सुबहें, और गरमागरम चाय—इन सबके बीच अगर कोई चीज इंसान का असली साथी है, तो वह है- blanket (रजाई)।
रजाई केवल एक कपड़ा नहीं, यह एक भावना है। यह वो सुकून है जो ठंडी रातों में शरीर को ही नहीं, मन को भी गर्माहट देता है। इसका साथ ऐसा है, जो हर उम्र, हर वर्ग के लोगों के लिए अनमोल है। और सच कहें तो, रजाई के बिना सर्दियां अधूरी लगती हैं।
वैसे तो रजाई का इतिहास लिखित रूप से कहीं दर्ज नहीं है, लेकिन भारतीय घरों में यह एक अनमोल विरासत की तरह चलती आ रही है। हर घर में एक ऐसी रजाई होती है, जो शायद आपकी दादी के जमाने की हो, लेकिन उसका कवर बदल-बदल कर उसे नया रूप दिया जाता है।
रजाई का महत्व उस समय और बढ़ जाता है, जब इसे किसी स्टोरेज से निकालकर धूप में रखकर तपाया जाता है। वो रजाई की गरमाहट, वो उसकी हल्की सी गंध, और उसमें दुबकने का मजा—यह अनुभव शब्दों में नहीं बताया जा सकता।
रजाई और आलस: एक अटूट रिश्ता
Blanket के अंदर घुसते ही इंसान का पूरा शरीर आलस के समुद्र में गोते लगाने लगता है। अलार्म बजता है, लेकिन रजाई के अंदर का माहौल इतना आरामदायक होता है कि बाहर कदम रखने का ख्याल ही ठंडा पड़ जाता है। सर्दियों में रजाई से बाहर निकलने की कोशिश एक युद्ध जीतने के समान है। यहां तक कि अगर आप सुबह अलार्म बंद करने के लिए हाथ बाहर निकालते हैं, तो ऐसा लगता है मानो आपने अपनी जान जोखिम में डाल दी हो।
रजाई के अंदर का माहौल ऐसा होता है, जैसे स्वर्ग की सीढ़ियां वहीं से शुरू हो रही हों। आप चाहे जितने तनाव में हों, एक बार रजाई में घुसने के बाद ऐसा लगता है कि दुनिया की सारी समस्याएं वहीं खत्म हो गईं।
Blanket (रजाई) का सामाजिक महत्व
रजाई केवल व्यक्तिगत सुख का साधन नहीं है, इसका सामाजिक महत्व भी है। सर्दियों की दोपहर में धूप में बैठना, रात में रजाई ओढ़ कर बैठना और गपशप करना एक परंपरा की तरह है। यह वो समय होता है, जब रिश्तेदारों के साथ ठहाके लगाए जाते हैं, और बचपन की कहानियां दोहराई जाती हैं।
गांवों में तो रजाई के अंदर बैठकर ताश खेलना, मूंगफली खाना, और चाय की चुस्कियों का अपना अलग ही आनंद है। यह सर्दियों का ऐसा अनुभव है, जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
Blanket: रजाई के नाम एक प्यारा सा सलाम
रजाई महज कपड़ों की तह नहीं, यह एक भावना है। यह सर्दियों की सबसे शांत, सबसे आरामदायक और सबसे खास जगह है। बाहर चाहे कितनी ही ठंड हो, रजाई के अंदर हमेशा गर्मजोशी रहती है। यह वो जगह है, जहां समय ठहर जाता है और दुनिया की सारी परेशानियां बाहर छूट जाती हैं।
सुबह का अलार्म बजता है, दिनचर्या बुलाती है, लेकिन रजाई के अंदर की दुनिया में ये सब बेमानी लगता है। यहां केवल सुकून है—एक ऐसा सुकून, जो ठंड के मौसम में हर किसी को अपना बना लेता है। Blanket वो साथी है, जो सर्दियों को खास बनाता है, और इस खासियत को शब्दों में पिरोना शायद कभी मुमकिन नहीं हो पाएगा।
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