बिहार और झारखंड में सक्रिय कुख्यात नक्सली और 18 लाख के इनामी विवेक यादव की हत्या कर दी गई। उसका शव पुलिस ने डुमरिया थाना क्षेत्र के तेकरा खुर्द पकवा डैम के पास जंगल से बरामद किया। माना जा रहा है कि संगठन के भीतर आपसी वर्चस्व की लड़ाई के कारण उसके ही साथियों ने उसे गोली मार दी। पुलिस को शव के पास से कुछ सामान मिले हैं, जिनमें खैनी, मास्क और कुछ कागजात शामिल हैं। मारे गए नक्सली के शरीर पर दो गोलियों के निशान हैं—एक चेहरे पर और दूसरी पीठ में। शव की पहचान उसकी पत्नी ने देर रात की, जिसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए मगध मेडिकल अस्पताल भेज दिया। हालांकि, हत्या के पीछे कौन लोग शामिल हैं, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
विवेक यादव पर झारखंड में 15 लाख और बिहार में 3 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह पुलिस पर हमला, लेवी वसूली, लूट और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। वह लंबे समय से बिहार-झारखंड में नक्सली गतिविधियों का संचालन कर रहा था और पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। पुलिस ने उसे कई बार सरेंडर करने के लिए कहा था, यहां तक कि उसके घर पर इश्तेहार भी चिपकाए गए थे, लेकिन उसने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया था। अब उसकी हत्या के बाद पुलिस संगठन के भीतर चल रहे संघर्ष की तहकीकात कर रही है।
बचपन से ही नक्सली संगठन में शामिल था विवेक यादव
विवेक यादव बिहार के गया जिले के कोठी थाना क्षेत्र का रहने वाला था। उसका असली नाम विवेक यादव था, लेकिन वह सुनील, कारा जी, ब्रेड जी, राजेंद्र और बूटी जी जैसे कई नामों से जाना जाता था। उसके परिवार के लोगों ने बताया कि वह बचपन से ही नक्सली संगठन में शामिल हो गया था और तभी से उसकी दुनिया पूरी तरह बदल गई थी। उसकी पत्नी की बड़ी बहन ने बताया कि वह कभी-कभी ही घर आता था और परिवार से उसका ज्यादा संपर्क नहीं था।
कुछ महीने पहले ही संगठन के एक अन्य बड़े नेता संदीप यादव की बीमारी से मौत हो गई थी। संदीप यादव दक्षिणी बिहार के नक्सल संगठन का कमांडर था और उसकी मृत्यु के बाद विवेक यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस नई भूमिका में उसने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की और नक्सल प्रभावित इलाकों में अपना वर्चस्व बढ़ाया। हालांकि, संगठन के भीतर पहले से ही गुटबाजी की स्थिति थी और कई लोग विवेक यादव के बढ़ते प्रभाव से नाखुश थे। पुलिस को शक है कि इन्हीं कारणों से संगठन के ही कुछ लोगों ने उसकी हत्या कर दी।
नक्सलियों में बढ़ती गुटबाजी और संगठन की कमजोरी
नक्सली संगठनों में हाल के दिनों में गुटबाजी बढ़ती जा रही है। एक ओर जहां पुलिस और सुरक्षा बलों के दबाव के कारण कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है, वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर आपसी संघर्ष तेज हो गया है। विवेक यादव की हत्या इसी गुटबाजी का नतीजा मानी जा रही है। पुलिस का मानना है कि संगठन के अंदर सत्ता की लड़ाई शुरू हो चुकी है, जिससे नक्सलियों के भीतर ही संघर्ष देखने को मिल रहा है।
पिछले कुछ महीनों में पुलिस ने कई नक्सल विरोधी अभियान चलाए हैं, जिनमें कई बड़े नक्सली या तो मारे गए हैं या फिर गिरफ्तार हुए हैं। इसके चलते नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। ऐसे में नेतृत्व को लेकर विवाद और ज्यादा बढ़ गया है। विवेक यादव की हत्या इस बात का संकेत है कि संगठन के अंदर आंतरिक कलह चरम पर है। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और इस हत्याकांड के पीछे के असली कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
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