नए वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआत: क्या होंगे बदलाव और आम जनता पर इसका असर

By
Last updated:
Follow Us
Button

आज वित्तीय वर्ष 2024-25 का आखिरी दिन है और कल, 1 अप्रैल 2025 से नए वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआत होगी। इस नए टैक्स ईयर के साथ केंद्र सरकार की ओर से कई नई नीतियां और टैक्स नियम लागू होंगे, जिनका सीधा असर आम लोगों, कारोबारी वर्ग और निवेशकों पर पड़ेगा।

बजट घोषणाओं के तहत नए बदलाव

इस वर्ष का आम बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को पेश किया था, जिसमें कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई थीं। बजट में टैक्स स्लैब में मामूली बदलाव किया गया था। अब 7 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जबकि पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी।

वहीं, नई कर व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कर छूट की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया है। स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा भी जारी रहेगी, जिससे नौकरीपेशा लोगों को राहत मिलेगी।

GST दरों में बदलाव

1 अप्रैल से कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों में संशोधन किया जाएगा। कपड़े, जूते और दैनिक उपयोग की कुछ वस्तुओं पर टैक्स दरों में मामूली वृद्धि की गई है, जिससे आम लोगों की जेब पर हल्का असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉनिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए उन पर जीएसटी दरों में कमी की गई है, जिससे EV खरीदना सस्ता हो जाएगा।

बचत योजनाओं पर असर

नए वित्तीय वर्ष में कुछ बचत योजनाओं की ब्याज दरें भी बदलेंगी। सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) की ब्याज दरें 0.25% तक बढ़ाई गई हैं। इससे निवेशकों को अधिक रिटर्न मिलेगा।

आधार-पैन लिंकिंग की अंतिम तिथि

1 अप्रैल 2025 से उन लोगों के लिए पैन कार्ड निष्क्रिय हो जाएगा, जिन्होंने अभी तक अपने पैन को आधार से लिंक नहीं किया है। ऐसे लोगों को वित्तीय लेन-देन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

बिजली और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बदलाव
नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ बिजली की दरों में बढ़ोतरी की संभावना है। इसके अलावा, तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन कर सकती हैं, जिससे वाहन चालकों का बजट प्रभावित हो सकता है।

व्यापारियों और निवेशकों की तैयारी

व्यापारी वर्ग नए वित्तीय वर्ष में टैक्स रिटर्न दाखिल करने, बैलेंस शीट अपडेट करने और नई योजनाओं में निवेश की तैयारी में जुटे हैं। वहीं, शेयर बाजार के निवेशक भी नए वित्तीय वर्ष में सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं।

कुल मिलाकर


1 अप्रैल 2025 से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ कई बदलाव प्रभावी होंगे, जो देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित करेंगे। ऐसे में निवेशकों और करदाताओं को सतर्कता बरतने और सरकार की नई नीतियों पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।

Also read:- https://theuntoldmedia.com/nitish-kumar-apologized-for-leaving-the-bjp-and-admitted-his-mistake-to-the-public/


Discover more from The Untold Media

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

WhatsApp Group Join Now

Leave a Reply